Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.163.d12-d14: जैसे आकाश में तारे बार-बार प्रकट और लुप्त होते रहते हैं, वैसे ही ये जीव भी बार-बार संसार में लौटते रहते हैं। हे शुभ! इस मोक्षमार्ग को सुनो। ब्रह्माजी से लेकर स्थावर वृक्षों तक जिस संसार का वर्णन किया गया है, उसमें सभी जीव बार-बार लौटते हैं। | mahabharat अध्याय 13.163: मोक्षधर्मकी श्रेष्ठताका प्रतिपादन, मोक्षसाधक ज्ञानकी प्राप्तिका उपाय और मोक्षकी प्राप्तिमें वैराग्यकी प्रधानता] । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जैसे आकाश में तारे बार-बार प्रकट और लुप्त होते रहते हैं, वैसे ही ये जीव भी बार-बार संसार में लौटते रहते हैं। हे शुभ! इस मोक्षमार्ग को सुनो। ब्रह्माजी से लेकर स्थावर वृक्षों तक जिस संसार का वर्णन किया गया है, उसमें सभी जीव बार-बार लौटते हैं।
Just as the stars repeatedly appear and disappear in the sky, similarly these living beings keep returning to the world again and again. O auspicious one! Listen to this path of salvation. The world which has been described from Brahmaji to the immovable trees, all living beings return again and again.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥