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mahabharat 13.163.d11: यह संसार आदि से अन्त तक दुःखों से भरा हुआ कहा गया है। यह शोक, रोग, जरा और मृत्यु आदि दोषों से भरा हुआ है।   |   mahabharat अध्याय 13.163: मोक्षधर्मकी श्रेष्ठताका प्रतिपादन, मोक्षसाधक ज्ञानकी प्राप्तिका उपाय और मोक्षकी प्राप्तिमें वैराग्यकी प्रधानता]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 163: मोक्षधर्मकी श्रेष्ठताका प्रतिपादन, मोक्षसाधक ज्ञानकी प्राप्तिका उपाय और मोक्षकी प्राप्तिमें वैराग्यकी प्रधानता]  »  श्लोक d11
 
 
श्लोक  13.163.d11 
दु:खादिश्च दुरन्तश्च संसारोऽयं प्रकीर्तित:।
शोकव्याधिजरादोषैर्मरणेन च संयुत:॥
 
 
अनुवाद
यह संसार आदि से अन्त तक दुःखों से भरा हुआ कहा गया है। यह शोक, रोग, जरा और मृत्यु आदि दोषों से भरा हुआ है।
 
This world is said to be full of sorrow from the beginning and the end. It is filled with the defects of grief, disease, old age and death.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)