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श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 162: प्राणियोंकी शुभ और अशुभ गतिका निश्चय करानेवाले लक्षणोंका वर्णन, मृत्युके दो भेद और यत्नसाध्य मृत्युके चार भेदोंका कथन, कर्तव्य-पालनपूर्वक शरीरत्यागका महान् फल और काम, क्रोध आदिद्वारा देहत्याग करनेसे नरककी प्राप्ति]  »  श्लोक d63-d64
 
 
श्लोक  13.162.d63-d64 
औदकं चाष्टकाश्राद्धं बहुभिर्बहुभि: कृतम्।
आप्यायनं मृतानां तत् परलोके भवेच्छुभम्॥
एतत् सर्वं मया प्रोक्तं मानुषाणां हितं वच:॥
 
 
अनुवाद
अनेक लोगों द्वारा किया गया जल तर्पण और अष्टक श्राद्ध शुभ है और परलोक में मृतकों को तृप्ति प्रदान करने वाला है। मैंने मनुष्यों के लिए हितकारी ये सब बातें बताई हैं।
 
The offering of water and the Ashtakashraddha performed by many people is auspicious and satisfies the dead in the next world. I have told all these things which are beneficial for humans.
 
(दाक्षिणात्य प्रतिमें अध्याय समाप्त)


 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)