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mahabharat 13.162.d62: दिन, शुक्ल पक्ष और उत्तरायण मरने के लिए सर्वोत्तम समय हैं। इसके विपरीत, रात्रि, कृष्ण पक्ष और दक्षिणायन निंदित हैं।   |   mahabharat अध्याय 13.162: प्राणियोंकी शुभ और अशुभ गतिका निश्चय करानेवाले लक्षणोंका वर्णन, मृत्युके दो भेद और यत्नसाध्य मृत्युके चार भेदोंका कथन, कर्तव्य-पालनपूर्वक शरीरत्यागका महान् फल और काम, क्रोध आदिद्वारा देहत्याग करनेसे नरककी प्राप्ति]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.162.d62 
दिवा च शुक्लपक्षश्च उत्तरायणमेव च।
मुमूर्षूणां प्रशस्तानि विपरीतं तु गर्हितम्॥
 
 
अनुवाद
दिन, शुक्ल पक्ष और उत्तरायण मरने के लिए सर्वोत्तम समय हैं। इसके विपरीत, रात्रि, कृष्ण पक्ष और दक्षिणायन निंदित हैं।
 
Daytime, Shukla paksha and Uttarayan are the best times for dying people. On the contrary, night, Krishna paksha and Dakshinayan are condemned.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)