Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.162.d6: विचार करें कि जो जानवर लोगों को परेशान करते हैं, साँप और बिच्छू जैसे जीव, तथा सूखे और कांटेदार पेड़, ये सभी आरंभ में राक्षसी स्वभाव वाले मनुष्य ही थे। | mahabharat अध्याय 13.162: प्राणियोंकी शुभ और अशुभ गतिका निश्चय करानेवाले लक्षणोंका वर्णन, मृत्युके दो भेद और यत्नसाध्य मृत्युके चार भेदोंका कथन, कर्तव्य-पालनपूर्वक शरीरत्यागका महान् फल और काम, क्रोध आदिद्वारा देहत्याग करनेसे नरककी प्राप्ति] । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
विचार करें कि जो जानवर लोगों को परेशान करते हैं, साँप और बिच्छू जैसे जीव, तथा सूखे और कांटेदार पेड़, ये सभी आरंभ में राक्षसी स्वभाव वाले मनुष्य ही थे।
Consider that the animals that agitate people, creatures like snakes and scorpions, and the dry and thorny trees were all humans in the beginning with demoniac natures.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥