Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.162.d40-d43: शुभ हो! इस प्रकार शरीर त्यागकर मनुष्य स्वर्ग में स्थित हो जाता है। यदि कोई मनुष्य अग्नि में प्रवेश करना चाहे, तो उसे इसी प्रकार विदा लेकर किसी पवित्र क्षेत्र में या नदियों के तट पर लकड़ी की चिता बनानी चाहिए। फिर देवताओं को नमस्कार करके परिक्रमा करके, शुद्ध एवं दृढ़ निश्चयी होकर श्री नारायण हरिका का स्मरण करके, ब्राह्मणों को प्रणाम करके प्रज्वलित अग्नि में प्रवेश करना चाहिए। | mahabharat अध्याय 13.162: प्राणियोंकी शुभ और अशुभ गतिका निश्चय करानेवाले लक्षणोंका वर्णन, मृत्युके दो भेद और यत्नसाध्य मृत्युके चार भेदोंका कथन, कर्तव्य-पालनपूर्वक शरीरत्यागका महान् फल और काम, क्रोध आदिद्वारा देहत्याग करनेसे नरककी प्राप्ति] । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
शुभ हो! इस प्रकार शरीर त्यागकर मनुष्य स्वर्ग में स्थित हो जाता है। यदि कोई मनुष्य अग्नि में प्रवेश करना चाहे, तो उसे इसी प्रकार विदा लेकर किसी पवित्र क्षेत्र में या नदियों के तट पर लकड़ी की चिता बनानी चाहिए। फिर देवताओं को नमस्कार करके परिक्रमा करके, शुद्ध एवं दृढ़ निश्चयी होकर श्री नारायण हरिका का स्मरण करके, ब्राह्मणों को प्रणाम करके प्रज्वलित अग्नि में प्रवेश करना चाहिए।
Good luck! In this way, by renouncing the body, man becomes established in heaven. If a person wants to enter the fire, then after taking leave in the same manner, he should build a wooden pyre in some sacred area or on the banks of rivers. Then, after saluting the gods and circumambulating, be pure and full of determination, remember Shri Narayan Harika, bow to the brahmins and enter the blazing fire.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥