Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.162.d4-d5: जो लोग हिंसक, चोर, धूर्त, व्यभिचारी, दुष्ट कर्मों में लिप्त, पवित्रता और शुभ आचरण से रहित, पवित्रता से घृणा करने वाले, पापी और दूसरों के चरित्र पर कलंक लगाने वाले हैं, ऐसे आचरण वाले अर्थात् राक्षसी स्वभाव वाले लोग जीवित रहते हुए नरक में जाते हैं। | mahabharat अध्याय 13.162: प्राणियोंकी शुभ और अशुभ गतिका निश्चय करानेवाले लक्षणोंका वर्णन, मृत्युके दो भेद और यत्नसाध्य मृत्युके चार भेदोंका कथन, कर्तव्य-पालनपूर्वक शरीरत्यागका महान् फल और काम, क्रोध आदिद्वारा देहत्याग करनेसे नरककी प्राप्ति] । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हिंस्राश्चोराश्च धूर्ताश्च परदाराभिमर्शका:।
नीचकर्मरता ये च शौचमङ्गलवर्जिता:॥
शुचिविद्वेषिण: पापा लोकचारित्रदूषका:।
एवंयुक्तसमाचारा जीवन्तो नरकालया:॥
अनुवाद
जो लोग हिंसक, चोर, धूर्त, व्यभिचारी, दुष्ट कर्मों में लिप्त, पवित्रता और शुभ आचरण से रहित, पवित्रता से घृणा करने वाले, पापी और दूसरों के चरित्र पर कलंक लगाने वाले हैं, ऐसे आचरण वाले अर्थात् राक्षसी स्वभाव वाले लोग जीवित रहते हुए नरक में जाते हैं।
Those who are violent, thieves, cunning, womanisers, indulge in wicked deeds, devoid of cleanliness and auspicious behaviour, those who hate purity, sinners and those who malign the character of others, those with such behaviour, that is those with a demonic nature, are in hell while they are alive.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥