Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.162.d24: श्री महेश्वर बोले - देवी! मैं प्रसन्नतापूर्वक तुमसे यह विषय वर्णन करता हूँ, तुम एकाग्र होकर सुनो। इस संसार में दो प्रकार की मृत्यु होती है, एक स्वाभाविक और दूसरी संभव। | mahabharat अध्याय 13.162: प्राणियोंकी शुभ और अशुभ गतिका निश्चय करानेवाले लक्षणोंका वर्णन, मृत्युके दो भेद और यत्नसाध्य मृत्युके चार भेदोंका कथन, कर्तव्य-पालनपूर्वक शरीरत्यागका महान् फल और काम, क्रोध आदिद्वारा देहत्याग करनेसे नरककी प्राप्ति] । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
श्री महेश्वर बोले - देवी! मैं प्रसन्नतापूर्वक तुमसे यह विषय वर्णन करता हूँ, तुम एकाग्र होकर सुनो। इस संसार में दो प्रकार की मृत्यु होती है, एक स्वाभाविक और दूसरी संभव।
Shri Maheshwar said – Goddess! I happily describe this topic to you, you listen with concentration. There are two types of deaths in this world, one is natural and the other is possible.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥