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mahabharat 13.162.d23: उन्होंने पूछा - हे प्रभु! जो लोग मृत्यु के निकट हैं, उन्हें किस प्रकार प्राण त्यागना चाहिए, जिससे उन्हें परलोक में मोक्ष प्राप्त हो?   |   mahabharat अध्याय 13.162: प्राणियोंकी शुभ और अशुभ गतिका निश्चय करानेवाले लक्षणोंका वर्णन, मृत्युके दो भेद और यत्नसाध्य मृत्युके चार भेदोंका कथन, कर्तव्य-पालनपूर्वक शरीरत्यागका महान् फल और काम, क्रोध आदिद्वारा देहत्याग करनेसे नरककी प्राप्ति]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 162: प्राणियोंकी शुभ और अशुभ गतिका निश्चय करानेवाले लक्षणोंका वर्णन, मृत्युके दो भेद और यत्नसाध्य मृत्युके चार भेदोंका कथन, कर्तव्य-पालनपूर्वक शरीरत्यागका महान् फल और काम, क्रोध आदिद्वारा देहत्याग करनेसे नरककी प्राप्ति]  »  श्लोक d23
 
 
श्लोक  13.162.d23 
उमोवाच
भगवन् मानुषा: केचित् कालधर्ममुपस्थिता:।
प्राणमोक्षं कथं कृत्वा परत्र हितमाप्नुयु:॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने पूछा - हे प्रभु! जो लोग मृत्यु के निकट हैं, उन्हें किस प्रकार प्राण त्यागना चाहिए, जिससे उन्हें परलोक में मोक्ष प्राप्त हो?
 
He asked - O Lord! Those who are near death, how should they give up their lives so that they can attain salvation in the next world?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)