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mahabharat 13.162.d22: इस संसार में सभी सजीव और निर्जीव वस्तुएँ अच्छे और बुरे गुणों से भरी हैं। प्रिय! इनमें जो भी अच्छा है, उसे भगवान समझो और जो भी बुरा है, उसे राक्षस समझो।   |   mahabharat अध्याय 13.162: प्राणियोंकी शुभ और अशुभ गतिका निश्चय करानेवाले लक्षणोंका वर्णन, मृत्युके दो भेद और यत्नसाध्य मृत्युके चार भेदोंका कथन, कर्तव्य-पालनपूर्वक शरीरत्यागका महान् फल और काम, क्रोध आदिद्वारा देहत्याग करनेसे नरककी प्राप्ति]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 162: प्राणियोंकी शुभ और अशुभ गतिका निश्चय करानेवाले लक्षणोंका वर्णन, मृत्युके दो भेद और यत्नसाध्य मृत्युके चार भेदोंका कथन, कर्तव्य-पालनपूर्वक शरीरत्यागका महान् फल और काम, क्रोध आदिद्वारा देहत्याग करनेसे नरककी प्राप्ति]  »  श्लोक d22
 
 
श्लोक  13.162.d22 
शुभाशुभमयं लोके सर्वं स्थावरजङ्गमम्।
दैवं शुभमिति प्राहुरासुरं चाशुभं प्रिये॥
 
 
अनुवाद
इस संसार में सभी सजीव और निर्जीव वस्तुएँ अच्छे और बुरे गुणों से भरी हैं। प्रिय! इनमें जो भी अच्छा है, उसे भगवान समझो और जो भी बुरा है, उसे राक्षस समझो।
 
All living and non-living things in this world are full of good and bad. Dear! Whatever is good among them, consider it as God and whatever is bad, consider it as demon.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)