Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.162.d20-d21: इस संसार में जो भी अन्य शुभ कर्म लोगों के लिए हितकर है, वह स्वर्ग प्राप्ति का साधन है। शुभनाने! जो भी पशु और वृक्ष लोगों के लिए हितकारी हैं, उन्हें देवताओं का ही समझो। | mahabharat अध्याय 13.162: प्राणियोंकी शुभ और अशुभ गतिका निश्चय करानेवाले लक्षणोंका वर्णन, मृत्युके दो भेद और यत्नसाध्य मृत्युके चार भेदोंका कथन, कर्तव्य-पालनपूर्वक शरीरत्यागका महान् फल और काम, क्रोध आदिद्वारा देहत्याग करनेसे नरककी प्राप्ति] । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इस संसार में जो भी अन्य शुभ कर्म लोगों के लिए हितकर है, वह स्वर्ग प्राप्ति का साधन है। शुभनाने! जो भी पशु और वृक्ष लोगों के लिए हितकारी हैं, उन्हें देवताओं का ही समझो।
Any other good deed in this world which is favourable to the people is a means to attain heaven. Shubhnaane! All the animals and trees which are beneficial to the people, consider them to be from the side of the gods.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥