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mahabharat 13.162.d19: इस संसार के व्यवहार से परलोक में होने की स्थिति का अनुमान लगाया जाता है। जो लोग इस संसार में ऐसा जीवन जीते हैं, वे स्वर्ग जाते हैं।   |   mahabharat अध्याय 13.162: प्राणियोंकी शुभ और अशुभ गतिका निश्चय करानेवाले लक्षणोंका वर्णन, मृत्युके दो भेद और यत्नसाध्य मृत्युके चार भेदोंका कथन, कर्तव्य-पालनपूर्वक शरीरत्यागका महान् फल और काम, क्रोध आदिद्वारा देहत्याग करनेसे नरककी प्राप्ति]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 162: प्राणियोंकी शुभ और अशुभ गतिका निश्चय करानेवाले लक्षणोंका वर्णन, मृत्युके दो भेद और यत्नसाध्य मृत्युके चार भेदोंका कथन, कर्तव्य-पालनपूर्वक शरीरत्यागका महान् फल और काम, क्रोध आदिद्वारा देहत्याग करनेसे नरककी प्राप्ति]  »  श्लोक d19
 
 
श्लोक  13.162.d19 
ऐहिकेन तु वृत्तेन पारत्रमनुमीयते।
एवंविधा नरा लोके जीवन्त: स्वर्गगामिन:॥
 
 
अनुवाद
इस संसार के व्यवहार से परलोक में होने की स्थिति का अनुमान लगाया जाता है। जो लोग इस संसार में ऐसा जीवन जीते हैं, वे स्वर्ग जाते हैं।
 
The behaviour of this world is used to predict the state of being in the next world. People who lead such a life in this world go to heaven.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)