Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.162.d14-d15: जो लोग दूसरों के दुःख-दर्द को अपना समझते हैं, अपने बड़ों की सेवा में तत्पर रहते हैं, देवताओं और ब्राह्मणों की पूजा करते हैं, कृतज्ञ और विद्वान हैं, वे स्वर्ग जाते हैं। | mahabharat अध्याय 13.162: प्राणियोंकी शुभ और अशुभ गतिका निश्चय करानेवाले लक्षणोंका वर्णन, मृत्युके दो भेद और यत्नसाध्य मृत्युके चार भेदोंका कथन, कर्तव्य-पालनपूर्वक शरीरत्यागका महान् फल और काम, क्रोध आदिद्वारा देहत्याग करनेसे नरककी प्राप्ति] । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो लोग दूसरों के दुःख-दर्द को अपना समझते हैं, अपने बड़ों की सेवा में तत्पर रहते हैं, देवताओं और ब्राह्मणों की पूजा करते हैं, कृतज्ञ और विद्वान हैं, वे स्वर्ग जाते हैं।
Those who treat the pain and suffering of others as their own, are ready to serve their elders, worship the gods and Brahmins, are grateful and learned, go to heaven.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥