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mahabharat 13.162.d11: जो लोग गरीब होते हुए भी किसी भिखारी के मांगने पर उसे खुशी-खुशी कुछ दे देते हैं, वे स्वर्ग जाते हैं।   |   mahabharat अध्याय 13.162: प्राणियोंकी शुभ और अशुभ गतिका निश्चय करानेवाले लक्षणोंका वर्णन, मृत्युके दो भेद और यत्नसाध्य मृत्युके चार भेदोंका कथन, कर्तव्य-पालनपूर्वक शरीरत्यागका महान् फल और काम, क्रोध आदिद्वारा देहत्याग करनेसे नरककी प्राप्ति]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 162: प्राणियोंकी शुभ और अशुभ गतिका निश्चय करानेवाले लक्षणोंका वर्णन, मृत्युके दो भेद और यत्नसाध्य मृत्युके चार भेदोंका कथन, कर्तव्य-पालनपूर्वक शरीरत्यागका महान् फल और काम, क्रोध आदिद्वारा देहत्याग करनेसे नरककी प्राप्ति]  »  श्लोक d11
 
 
श्लोक  13.162.d11 
दरिद्रा अपि ये केचिद् याचिता: प्रीतिपूर्वकम्।
ददत्येव च यत् किंचित् ते नरा: स्वर्गगामिन:॥
 
 
अनुवाद
जो लोग गरीब होते हुए भी किसी भिखारी के मांगने पर उसे खुशी-खुशी कुछ दे देते हैं, वे स्वर्ग जाते हैं।
 
Those who, in spite of being poor, happily give something to a beggar when he asks for it, go to heaven.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)