Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.162.d1: उसने पूछा, "प्रभु! क्या मनुष्य को जीवित रहते हुए अपने भाग्य का पता होता है या नहीं? अच्छे भाग्य वाले व्यक्ति का जीवन बुरे भाग्य वाले व्यक्ति के जीवन जैसा नहीं हो सकता। मैं इसके बारे में सुनना चाहती हूँ, कृपया मुझे बताएँ।" | mahabharat अध्याय 13.162: प्राणियोंकी शुभ और अशुभ गतिका निश्चय करानेवाले लक्षणोंका वर्णन, मृत्युके दो भेद और यत्नसाध्य मृत्युके चार भेदोंका कथन, कर्तव्य-पालनपूर्वक शरीरत्यागका महान् फल और काम, क्रोध आदिद्वारा देहत्याग करनेसे नरककी प्राप्ति] । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उसने पूछा, "प्रभु! क्या मनुष्य को जीवित रहते हुए अपने भाग्य का पता होता है या नहीं? अच्छे भाग्य वाले व्यक्ति का जीवन बुरे भाग्य वाले व्यक्ति के जीवन जैसा नहीं हो सकता। मैं इसके बारे में सुनना चाहती हूँ, कृपया मुझे बताएँ।"
She asked - Prabhu! Do humans know their fate while they are alive or not? The life of a person with a good fate cannot be the same as that of a person with a bad fate. I want to hear about this, please tell me.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥