vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 13: अनुशासन पर्व
»
अध्याय 161: श्राद्धविधान आदिका वर्णन, दानकी त्रिविधतासे उसके फलकी भी त्रिविधताका उल्लेख, दानके पाँच फल, नाना प्रकारके धर्म और उनके फलोंका प्रतिपादन]
»
श्लोक d29
श्लोक
13.161.d29
एष प्रोक्त: समासेन पितृयज्ञ: सनातन:।
पितरस्तेन तुष्यन्ति कर्ता च फलमाप्नुयात्॥
अनुवाद
इस सनातन पितृयज्ञ का संक्षेप में वर्णन किया गया। इससे पितर तृप्त होते हैं और श्राद्धकर्ता को शुभ फल प्राप्त होता है।
This Sanatan Pitriyagya was briefly described. With this the ancestors are satisfied and the Shraddha performer gets good results.
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd