श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 161: श्राद्धविधान आदिका वर्णन, दानकी त्रिविधतासे उसके फलकी भी त्रिविधताका उल्लेख, दानके पाँच फल, नाना प्रकारके धर्म और उनके फलोंका प्रतिपादन]  »  श्लोक d15
 
 
श्लोक  13.161.d15 
कुतप: खड्गपात्रं च कुशा दर्भास्तिला मधु।
कालशाकं गजच्छाया पवित्रं श्राद्धकर्मसु॥
 
 
अनुवाद
कुतप, खड्गपत्र, कुशा, दर्भा, तिल, मधु, कलशक और गजच्छय- ये वस्तुएं श्राद्ध कर्म में पवित्र मानी जाती हैं।
 
Kutap, Khadgapatra, Kusha, Darbha, Til, Madhu, Kalashak and Gajchchaya – these things are considered sacred in Shraddha rituals.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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