Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.160.d56: मनुष्य को चाहिए कि वह पवित्र स्थान में स्नान करके शुद्ध शरीर धारण करके पंचमहाभूतों, चन्द्रमा, सूर्य, दोनों समय की संध्यावंदन, धर्म, यम तथा पितरों की सेवा में अपने को समर्पित कर दे, तत्पश्चात व्रत धारण कर धर्म का पालन करे। | mahabharat अध्याय 13.160: शुभाशुभ मानस आदि तीन प्रकारके कर्मोंका स्वरूप और उनके फलका एवं मद्यसेवनके दोषोंका वर्णन, आहार-शुद्धि, मांसभक्षणसे दोष, मांस न खानेसे लाभ, जीवदयाके महत्त्व, गुरुपूजाकी विधि, उपवास-विधि, ब्रह्मचर्यपालन, तीर्थचर्चा, सर्वसाधारण द्रव्यके दानसे पुण्य, अन्न, सुवर्ण, गौ, भूमि, कन्या और विद्यादानका माहात्म्य, पुण्यतम देश-काल, दिये हुए दान और धर्मकी निष्फलता, विविध प्रकारके दान, लौकिक-वैदिक यज्ञ तथा देवताओंकी पूजाका निरूपण] । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मनुष्य को चाहिए कि वह पवित्र स्थान में स्नान करके शुद्ध शरीर धारण करके पंचमहाभूतों, चन्द्रमा, सूर्य, दोनों समय की संध्यावंदन, धर्म, यम तथा पितरों की सेवा में अपने को समर्पित कर दे, तत्पश्चात व्रत धारण कर धर्म का पालन करे।
After taking a ritual bath in a holy place and having a pure body, a person should dedicate himself to the five elements, the moon, the sun, the evening prayers of both the times, Dharma, Yama and the service of the ancestors and then observe a fast and follow the religion.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥