Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.160.d5: विद्रोह, ईर्ष्या, पराए धन की इच्छा - ये मानसिक पाप हैं। जब धार्मिक कार्यों में श्रद्धा का अभाव हो जाता है और पाप कर्मों में हर्ष और उत्साह बढ़ जाता है, तो ऐसे पाप कर्म मानसिक पाप कहलाते हैं। | mahabharat अध्याय 13.160: शुभाशुभ मानस आदि तीन प्रकारके कर्मोंका स्वरूप और उनके फलका एवं मद्यसेवनके दोषोंका वर्णन, आहार-शुद्धि, मांसभक्षणसे दोष, मांस न खानेसे लाभ, जीवदयाके महत्त्व, गुरुपूजाकी विधि, उपवास-विधि, ब्रह्मचर्यपालन, तीर्थचर्चा, सर्वसाधारण द्रव्यके दानसे पुण्य, अन्न, सुवर्ण, गौ, भूमि, कन्या और विद्यादानका माहात्म्य, पुण्यतम देश-काल, दिये हुए दान और धर्मकी निष्फलता, विविध प्रकारके दान, लौकिक-वैदिक यज्ञ तथा देवताओंकी पूजाका निरूपण] । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अभिद्रोहोऽभ्यसूया च परार्थेषु च स्पृहा।
धर्मकार्ये यदाश्रद्धा पापकर्मणि हर्षणम्॥
एवमाद्यशुभं कर्म मनसा पापमुच्यते।
अनुवाद
विद्रोह, ईर्ष्या, पराए धन की इच्छा - ये मानसिक पाप हैं। जब धार्मिक कार्यों में श्रद्धा का अभाव हो जाता है और पाप कर्मों में हर्ष और उत्साह बढ़ जाता है, तो ऐसे पाप कर्म मानसिक पाप कहलाते हैं।
Rebellion, jealousy, desire for someone else's wealth - these are mental evil deeds. When there is lack of faith in religious activities, and joy and enthusiasm increase in sinful acts, then such evil deeds are called mental sins.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥