Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.160.d37: सबसे पहले सभी बुरी आदतों को एक साथ या एक-एक करके त्याग देना चाहिए। ऐसा करने से व्यक्ति को धार्मिक आचरण का फल मिलता है; क्योंकि बुरी आदतों को त्यागना बहुत कठिन होता है। | mahabharat अध्याय 13.160: शुभाशुभ मानस आदि तीन प्रकारके कर्मोंका स्वरूप और उनके फलका एवं मद्यसेवनके दोषोंका वर्णन, आहार-शुद्धि, मांसभक्षणसे दोष, मांस न खानेसे लाभ, जीवदयाके महत्त्व, गुरुपूजाकी विधि, उपवास-विधि, ब्रह्मचर्यपालन, तीर्थचर्चा, सर्वसाधारण द्रव्यके दानसे पुण्य, अन्न, सुवर्ण, गौ, भूमि, कन्या और विद्यादानका माहात्म्य, पुण्यतम देश-काल, दिये हुए दान और धर्मकी निष्फलता, विविध प्रकारके दान, लौकिक-वैदिक यज्ञ तथा देवताओंकी पूजाका निरूपण] । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
प्रथमं वर्जयेद् दोषान् युगपत् पृथगेव वा।
तथा धर्ममवाप्नोति दोषत्यागो हि दुष्कर:॥
अनुवाद
सबसे पहले सभी बुरी आदतों को एक साथ या एक-एक करके त्याग देना चाहिए। ऐसा करने से व्यक्ति को धार्मिक आचरण का फल मिलता है; क्योंकि बुरी आदतों को त्यागना बहुत कठिन होता है।
First of all, all the bad habits should be abandoned either together or one by one. By doing this, a person gets the fruits of religious conduct; because it is very difficult to abandon bad habits.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥