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श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 160: शुभाशुभ मानस आदि तीन प्रकारके कर्मोंका स्वरूप और उनके फलका एवं मद्यसेवनके दोषोंका वर्णन, आहार-शुद्धि, मांसभक्षणसे दोष, मांस न खानेसे लाभ, जीवदयाके महत्त्व, गुरुपूजाकी विधि, उपवास-विधि, ब्रह्मचर्यपालन, तीर्थचर्चा, सर्वसाधारण द्रव्यके दानसे पुण्य, अन्न, सुवर्ण, गौ, भूमि, कन्या और विद्यादानका माहात्म्य, पुण्यतम देश-काल, दिये हुए दान और धर्मकी निष्फलता, विविध प्रकारके दान, लौकिक-वैदिक यज्ञ तथा देवताओंकी पूजाका निरूपण]  »  श्लोक d34
 
 
श्लोक  13.160.d34 
तस्माद् बुद्धेर्हि रक्षार्थं सद्भि: पानं विवर्जितम्।
 
 
अनुवाद
इसलिए महान पुरुषों ने अपनी बुद्धि की रक्षा के लिए शराब पीना छोड़ दिया है।
 
Therefore, great men have given up drinking to protect their intellect.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)