Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.160.d299-d301: देवी! इस पृथ्वी पर जो मनुष्य देवताओं के प्रति आदर प्रकट करने के उद्देश्य से नाना प्रकार के गन्ध, माला, उत्तम अन्न, धूपबत्ती आदि स्तुतियों से देवताओं की स्तुति करते हैं तथा शुद्ध मन से नृत्य, वाद्य, गायन तथा अन्य नेत्रों को आकर्षित करने वाले कार्यक्रमों द्वारा देवताओं की पूजा करते हैं, उनकी भक्तिमय सेवा से पूजित देवता स्वर्ग में भी समान रूप से संतुष्ट होते हैं। | mahabharat अध्याय 13.160: शुभाशुभ मानस आदि तीन प्रकारके कर्मोंका स्वरूप और उनके फलका एवं मद्यसेवनके दोषोंका वर्णन, आहार-शुद्धि, मांसभक्षणसे दोष, मांस न खानेसे लाभ, जीवदयाके महत्त्व, गुरुपूजाकी विधि, उपवास-विधि, ब्रह्मचर्यपालन, तीर्थचर्चा, सर्वसाधारण द्रव्यके दानसे पुण्य, अन्न, सुवर्ण, गौ, भूमि, कन्या और विद्यादानका माहात्म्य, पुण्यतम देश-काल, दिये हुए दान और धर्मकी निष्फलता, विविध प्रकारके दान, लौकिक-वैदिक यज्ञ तथा देवताओंकी पूजाका निरूपण] । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
देवी! इस पृथ्वी पर जो मनुष्य देवताओं के प्रति आदर प्रकट करने के उद्देश्य से नाना प्रकार के गन्ध, माला, उत्तम अन्न, धूपबत्ती आदि स्तुतियों से देवताओं की स्तुति करते हैं तथा शुद्ध मन से नृत्य, वाद्य, गायन तथा अन्य नेत्रों को आकर्षित करने वाले कार्यक्रमों द्वारा देवताओं की पूजा करते हैं, उनकी भक्तिमय सेवा से पूजित देवता स्वर्ग में भी समान रूप से संतुष्ट होते हैं।
Goddess! On this earth, the people who praise the Gods with different types of fragrances, garlands, good grains, incense sticks and many praises for the purpose of showing respect to the Gods and with a pure mind, worship the Gods through dance, musical instruments, singing and other programs that attract the eyes, the Gods who are worshiped with their devotional service are equally satisfied in heaven.
(दाक्षिणात्य प्रतिमें अध्याय समाप्त)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥