Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.160.d294: अतः यजमान स्वर्ग में जाकर देवताओं के साथ सुख भोगता है। यज्ञ के समान कोई दान नहीं है और यज्ञ के समान कोई धन नहीं है। देवी! सभी धर्मों का उद्देश्य यज्ञ में ही स्थापित है। | mahabharat अध्याय 13.160: शुभाशुभ मानस आदि तीन प्रकारके कर्मोंका स्वरूप और उनके फलका एवं मद्यसेवनके दोषोंका वर्णन, आहार-शुद्धि, मांसभक्षणसे दोष, मांस न खानेसे लाभ, जीवदयाके महत्त्व, गुरुपूजाकी विधि, उपवास-विधि, ब्रह्मचर्यपालन, तीर्थचर्चा, सर्वसाधारण द्रव्यके दानसे पुण्य, अन्न, सुवर्ण, गौ, भूमि, कन्या और विद्यादानका माहात्म्य, पुण्यतम देश-काल, दिये हुए दान और धर्मकी निष्फलता, विविध प्रकारके दान, लौकिक-वैदिक यज्ञ तथा देवताओंकी पूजाका निरूपण] । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अतः यजमान स्वर्ग में जाकर देवताओं के साथ सुख भोगता है। यज्ञ के समान कोई दान नहीं है और यज्ञ के समान कोई धन नहीं है। देवी! सभी धर्मों का उद्देश्य यज्ञ में ही स्थापित है।
Therefore the host goes to heaven and enjoys happiness with the gods. There is no charity like Yagya and there is no wealth like Yagya. Goddess! The purpose of all religions is established in Yagya.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥