Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.160.d271-d272: जो मनुष्य छत्र दान करता है, वह किसी भी जन्म में वंश से अलग नहीं होता। दास-दासियों का दान करने से मनुष्य अपने कर्मों का अंत कर देता है और मृत्यु के बाद उसे सभी प्रकार के अच्छे गुणों वाले दास-दासियाँ प्राप्त होती हैं। | mahabharat अध्याय 13.160: शुभाशुभ मानस आदि तीन प्रकारके कर्मोंका स्वरूप और उनके फलका एवं मद्यसेवनके दोषोंका वर्णन, आहार-शुद्धि, मांसभक्षणसे दोष, मांस न खानेसे लाभ, जीवदयाके महत्त्व, गुरुपूजाकी विधि, उपवास-विधि, ब्रह्मचर्यपालन, तीर्थचर्चा, सर्वसाधारण द्रव्यके दानसे पुण्य, अन्न, सुवर्ण, गौ, भूमि, कन्या और विद्यादानका माहात्म्य, पुण्यतम देश-काल, दिये हुए दान और धर्मकी निष्फलता, विविध प्रकारके दान, लौकिक-वैदिक यज्ञ तथा देवताओंकी पूजाका निरूपण] । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो मनुष्य छत्र दान करता है, वह किसी भी जन्म में वंश से अलग नहीं होता। दास-दासियों का दान करने से मनुष्य अपने कर्मों का अंत कर देता है और मृत्यु के बाद उसे सभी प्रकार के अच्छे गुणों वाले दास-दासियाँ प्राप्त होती हैं।
A man who donates an umbrella is not separated from the dynasty in any birth. By donating maids and slaves, a man puts an end to his karma and after death, he acquires all kinds of slaves and maids with good qualities.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥