Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.160.d265-d266: अथवा गौदान का फल चाहने वाला मनुष्य पृथ्वी पर तिलों से गौ की आकृति बनाकर उस तिलयुक्त गौ को रत्न और वस्त्र सहित किसी योग्य ब्राह्मण को दान कर दे। ऐसा करने से दानकर्ता को गौदान का फल प्राप्त होता है। | mahabharat अध्याय 13.160: शुभाशुभ मानस आदि तीन प्रकारके कर्मोंका स्वरूप और उनके फलका एवं मद्यसेवनके दोषोंका वर्णन, आहार-शुद्धि, मांसभक्षणसे दोष, मांस न खानेसे लाभ, जीवदयाके महत्त्व, गुरुपूजाकी विधि, उपवास-विधि, ब्रह्मचर्यपालन, तीर्थचर्चा, सर्वसाधारण द्रव्यके दानसे पुण्य, अन्न, सुवर्ण, गौ, भूमि, कन्या और विद्यादानका माहात्म्य, पुण्यतम देश-काल, दिये हुए दान और धर्मकी निष्फलता, विविध प्रकारके दान, लौकिक-वैदिक यज्ञ तथा देवताओंकी पूजाका निरूपण] । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
केवलं वा तिलैरेव भूमौ कृत्वा गवाकृतिम्।
सवस्त्रकं सरत्नं च पुंसा गोदानकांक्षिणा॥
तदर्हाय प्रदातव्यं तस्य गोदानत: फलम्॥
अनुवाद
अथवा गौदान का फल चाहने वाला मनुष्य पृथ्वी पर तिलों से गौ की आकृति बनाकर उस तिलयुक्त गौ को रत्न और वस्त्र सहित किसी योग्य ब्राह्मण को दान कर दे। ऐसा करने से दानकर्ता को गौदान का फल प्राप्त होता है।
Or, a person who desires the fruits of cow donation should make the shape of a cow using sesame seeds on the earth and donate that sesame seed-cow along with gems and clothes to a deserving Brahmin. By doing this, the donor gets the fruits of cow donation.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥