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mahabharat 13.160.d257-d258: श्री महेश्वर ने कहा - तुम एकाग्र होकर मुझसे तिलकल्प की विधि सुनो। मनुष्य चाहे धनवान हो या निर्धन, उसे विशेष रूप से तिल का दान करना चाहिए; क्योंकि तिल पवित्र, पापों का नाश करने वाले और पुण्यदायक माने जाते हैं।   |   mahabharat अध्याय 13.160: शुभाशुभ मानस आदि तीन प्रकारके कर्मोंका स्वरूप और उनके फलका एवं मद्यसेवनके दोषोंका वर्णन, आहार-शुद्धि, मांसभक्षणसे दोष, मांस न खानेसे लाभ, जीवदयाके महत्त्व, गुरुपूजाकी विधि, उपवास-विधि, ब्रह्मचर्यपालन, तीर्थचर्चा, सर्वसाधारण द्रव्यके दानसे पुण्य, अन्न, सुवर्ण, गौ, भूमि, कन्या और विद्यादानका माहात्म्य, पुण्यतम देश-काल, दिये हुए दान और धर्मकी निष्फलता, विविध प्रकारके दान, लौकिक-वैदिक यज्ञ तथा देवताओंकी पूजाका निरूपण]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 160: शुभाशुभ मानस आदि तीन प्रकारके कर्मोंका स्वरूप और उनके फलका एवं मद्यसेवनके दोषोंका वर्णन, आहार-शुद्धि, मांसभक्षणसे दोष, मांस न खानेसे लाभ, जीवदयाके महत्त्व, गुरुपूजाकी विधि, उपवास-विधि, ब्रह्मचर्यपालन, तीर्थचर्चा, सर्वसाधारण द्रव्यके दानसे पुण्य, अन्न, सुवर्ण, गौ, भूमि, कन्या और विद्यादानका माहात्म्य, पुण्यतम देश-काल, दिये हुए दान और धर्मकी निष्फलता, विविध प्रकारके दान, लौकिक-वैदिक यज्ञ तथा देवताओंकी पूजाका निरूपण]  »  श्लोक d257-d258
 
 
श्लोक  13.160.d257-d258 
श्रीमहेश्वर उवाच
तिलकल्पविधिं देवि तन्मे शृणु समाहिता॥
समृद्धैरसमृद्धैर्वा तिला देया विशेषत:।
तिला: पवित्रा: पापघ्ना: सुपुण्या इति संस्मृता:॥
 
 
अनुवाद
श्री महेश्वर ने कहा - तुम एकाग्र होकर मुझसे तिलकल्प की विधि सुनो। मनुष्य चाहे धनवान हो या निर्धन, उसे विशेष रूप से तिल का दान करना चाहिए; क्योंकि तिल पवित्र, पापों का नाश करने वाले और पुण्यदायक माने जाते हैं।
 
Shri Maheshwar said – You concentrate and listen to the method of Tilakalpa from me. Whether a person is rich or poor, he should especially donate sesame seeds; Because sesame seeds are considered sacred, destroyer of sins and virtuous.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)