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mahabharat 13.160.d246-d248: पहले बन्धु-बान्धवों से परामर्श करके कन्या का विवाह निश्चित कर ले, फिर उसे वस्त्र-आभूषणों से सुसज्जित कर दे, फिर उसके लिए मंडप बनाकर, दास-दासियों, अन्य सामग्री, आवश्यक घरेलू उपकरणों, पशुओं और अन्न से युक्त तथा वस्त्र-आभूषणों से सुसज्जित उस कन्या को अग्निदेव के समक्ष, यथायोग्य वर को, जो उससे प्रेम करता हो, उचित रीति से दान कर दे।   |   mahabharat अध्याय 13.160: शुभाशुभ मानस आदि तीन प्रकारके कर्मोंका स्वरूप और उनके फलका एवं मद्यसेवनके दोषोंका वर्णन, आहार-शुद्धि, मांसभक्षणसे दोष, मांस न खानेसे लाभ, जीवदयाके महत्त्व, गुरुपूजाकी विधि, उपवास-विधि, ब्रह्मचर्यपालन, तीर्थचर्चा, सर्वसाधारण द्रव्यके दानसे पुण्य, अन्न, सुवर्ण, गौ, भूमि, कन्या और विद्यादानका माहात्म्य, पुण्यतम देश-काल, दिये हुए दान और धर्मकी निष्फलता, विविध प्रकारके दान, लौकिक-वैदिक यज्ञ तथा देवताओंकी पूजाका निरूपण]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 160: शुभाशुभ मानस आदि तीन प्रकारके कर्मोंका स्वरूप और उनके फलका एवं मद्यसेवनके दोषोंका वर्णन, आहार-शुद्धि, मांसभक्षणसे दोष, मांस न खानेसे लाभ, जीवदयाके महत्त्व, गुरुपूजाकी विधि, उपवास-विधि, ब्रह्मचर्यपालन, तीर्थचर्चा, सर्वसाधारण द्रव्यके दानसे पुण्य, अन्न, सुवर्ण, गौ, भूमि, कन्या और विद्यादानका माहात्म्य, पुण्यतम देश-काल, दिये हुए दान और धर्मकी निष्फलता, विविध प्रकारके दान, लौकिक-वैदिक यज्ञ तथा देवताओंकी पूजाका निरूपण]  »  श्लोक d246-d248
 
 
श्लोक  13.160.d246-d248 
प्रथमं तां समाकल्प्य बन्धुभि: कृतनिश्चयाम्।
कारयित्वा गृहं पूर्वं दासीदासपरिच्छदै:॥
गृहोपकरणैश्चैव पशुधान्येन संयुताम्।
तदर्थिने तदर्हाय कन्यां तां समलङ्कृताम्॥
सविवाहं यथान्यायं प्रयच्छेदग्निसाक्षिकम्॥
 
 
अनुवाद
पहले बन्धु-बान्धवों से परामर्श करके कन्या का विवाह निश्चित कर ले, फिर उसे वस्त्र-आभूषणों से सुसज्जित कर दे, फिर उसके लिए मंडप बनाकर, दास-दासियों, अन्य सामग्री, आवश्यक घरेलू उपकरणों, पशुओं और अन्न से युक्त तथा वस्त्र-आभूषणों से सुसज्जित उस कन्या को अग्निदेव के समक्ष, यथायोग्य वर को, जो उससे प्रेम करता हो, उचित रीति से दान कर दे।
 
First, after consulting with the relatives, decide on the marriage of the girl, and then adorn her with clothes and jewellery. Then after making a pavilion for her, he should donate the girl, who is rich in slaves, other material, necessary household equipment, animals and grains and is adorned with clothes and jewellery, to a suitable groom who loves her, in the presence of Agnidev, in a suitable manner.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)