| श्री महाभारत » पर्व 13: अनुशासन पर्व » अध्याय 160: शुभाशुभ मानस आदि तीन प्रकारके कर्मोंका स्वरूप और उनके फलका एवं मद्यसेवनके दोषोंका वर्णन, आहार-शुद्धि, मांसभक्षणसे दोष, मांस न खानेसे लाभ, जीवदयाके महत्त्व, गुरुपूजाकी विधि, उपवास-विधि, ब्रह्मचर्यपालन, तीर्थचर्चा, सर्वसाधारण द्रव्यके दानसे पुण्य, अन्न, सुवर्ण, गौ, भूमि, कन्या और विद्यादानका माहात्म्य, पुण्यतम देश-काल, दिये हुए दान और धर्मकी निष्फलता, विविध प्रकारके दान, लौकिक-वैदिक यज्ञ तथा देवताओंकी पूजाका निरूपण] » श्लोक d224 |
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| | | | श्लोक 13.160.d224  | गाव: पवित्रं परमं गोषु लोका: प्रतिष्ठिता:।
कथंचिन्नावमन्तव्या गावो लोकस्य मातर:॥ | | | | | | अनुवाद | | गाय परम पवित्र है, गाय में ही सारा संसार बसा है। इसलिए गाय का किसी भी प्रकार से अपमान नहीं करना चाहिए; क्योंकि वे समस्त जगत की माता हैं। | | | | Cows are the most sacred things, the whole world is established in cows. Therefore, cows should not be insulted in any way; because they are the mothers of the whole world. | | ✨ ai-generated | | |
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