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mahabharat 13.160.d207: प्राचीन काल में सृष्टि की रचना की इच्छा से स्वयंभू ब्रह्माजी ने समस्त प्राणियों के जीवनयापन हेतु गायों की रचना की थी, इसीलिए इन्हें सबकी माता माना जाता है।   |   mahabharat अध्याय 13.160: शुभाशुभ मानस आदि तीन प्रकारके कर्मोंका स्वरूप और उनके फलका एवं मद्यसेवनके दोषोंका वर्णन, आहार-शुद्धि, मांसभक्षणसे दोष, मांस न खानेसे लाभ, जीवदयाके महत्त्व, गुरुपूजाकी विधि, उपवास-विधि, ब्रह्मचर्यपालन, तीर्थचर्चा, सर्वसाधारण द्रव्यके दानसे पुण्य, अन्न, सुवर्ण, गौ, भूमि, कन्या और विद्यादानका माहात्म्य, पुण्यतम देश-काल, दिये हुए दान और धर्मकी निष्फलता, विविध प्रकारके दान, लौकिक-वैदिक यज्ञ तथा देवताओंकी पूजाका निरूपण]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 160: शुभाशुभ मानस आदि तीन प्रकारके कर्मोंका स्वरूप और उनके फलका एवं मद्यसेवनके दोषोंका वर्णन, आहार-शुद्धि, मांसभक्षणसे दोष, मांस न खानेसे लाभ, जीवदयाके महत्त्व, गुरुपूजाकी विधि, उपवास-विधि, ब्रह्मचर्यपालन, तीर्थचर्चा, सर्वसाधारण द्रव्यके दानसे पुण्य, अन्न, सुवर्ण, गौ, भूमि, कन्या और विद्यादानका माहात्म्य, पुण्यतम देश-काल, दिये हुए दान और धर्मकी निष्फलता, विविध प्रकारके दान, लौकिक-वैदिक यज्ञ तथा देवताओंकी पूजाका निरूपण]  »  श्लोक d207
 
 
श्लोक  13.160.d207 
लोकान् सिसृक्षुणा पूर्वं गाव: सृष्टा: स्वयम्भुवा।
वृत्त्यर्थं सर्वभूतानां तस्मात् ता मातर: स्मृता:॥
 
 
अनुवाद
प्राचीन काल में सृष्टि की रचना की इच्छा से स्वयंभू ब्रह्माजी ने समस्त प्राणियों के जीवनयापन हेतु गायों की रचना की थी, इसीलिए इन्हें सबकी माता माना जाता है।
 
In ancient times, Swayambhu Brahmaji, who desired to create the world, created cows for the livelihood of all creatures. That is why they are considered the mothers of all.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)