Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.160.d19: जो मनुष्य किसी शत्रु को मार डालता है, या उसे बन्दी बनाकर कष्ट देता है, किसी गांव की रक्षा के लिए, अपने स्वामी का ऋण चुकाने के लिए, या दीन-दुखी लोगों पर दया करने के लिए, वह भी पापों से मुक्त हो जाता है। | mahabharat अध्याय 13.160: शुभाशुभ मानस आदि तीन प्रकारके कर्मोंका स्वरूप और उनके फलका एवं मद्यसेवनके दोषोंका वर्णन, आहार-शुद्धि, मांसभक्षणसे दोष, मांस न खानेसे लाभ, जीवदयाके महत्त्व, गुरुपूजाकी विधि, उपवास-विधि, ब्रह्मचर्यपालन, तीर्थचर्चा, सर्वसाधारण द्रव्यके दानसे पुण्य, अन्न, सुवर्ण, गौ, भूमि, कन्या और विद्यादानका माहात्म्य, पुण्यतम देश-काल, दिये हुए दान और धर्मकी निष्फलता, विविध प्रकारके दान, लौकिक-वैदिक यज्ञ तथा देवताओंकी पूजाका निरूपण] । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो मनुष्य किसी शत्रु को मार डालता है, या उसे बन्दी बनाकर कष्ट देता है, किसी गांव की रक्षा के लिए, अपने स्वामी का ऋण चुकाने के लिए, या दीन-दुखी लोगों पर दया करने के लिए, वह भी पापों से मुक्त हो जाता है।
He who kills an enemy, or captives him and inflicts pain on him, for the protection of a village, to repay the grain owed to his master, or to show mercy to the poor and the miserable, also becomes free from sins.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥