Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.160.d167-d168: शरद और वसंत ऋतु, पवित्र महीने, पक्षों में शुक्ल पक्ष, त्योहारों में पूर्णमासी, मघान नक्षत्र सहित स्पष्ट दिन, चंद्रग्रहण और सूर्यग्रहण - इन सभी को बहुत ही शुभ काल समझें। | mahabharat अध्याय 13.160: शुभाशुभ मानस आदि तीन प्रकारके कर्मोंका स्वरूप और उनके फलका एवं मद्यसेवनके दोषोंका वर्णन, आहार-शुद्धि, मांसभक्षणसे दोष, मांस न खानेसे लाभ, जीवदयाके महत्त्व, गुरुपूजाकी विधि, उपवास-विधि, ब्रह्मचर्यपालन, तीर्थचर्चा, सर्वसाधारण द्रव्यके दानसे पुण्य, अन्न, सुवर्ण, गौ, भूमि, कन्या और विद्यादानका माहात्म्य, पुण्यतम देश-काल, दिये हुए दान और धर्मकी निष्फलता, विविध प्रकारके दान, लौकिक-वैदिक यज्ञ तथा देवताओंकी पूजाका निरूपण] । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
शरद और वसंत ऋतु, पवित्र महीने, पक्षों में शुक्ल पक्ष, त्योहारों में पूर्णमासी, मघान नक्षत्र सहित स्पष्ट दिन, चंद्रग्रहण और सूर्यग्रहण - इन सभी को बहुत ही शुभ काल समझें।
Autumn and spring season, holy months, Shukla Paksha among the Pakshas, Purnmasi among the festivals, clear days with Maghan Nakshatra, lunar eclipse and solar eclipse - consider all these as very auspicious periods.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥