श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 159: यमलोक तथा वहाँके मार्गोंका वर्णन, पापियोंकी नरकयातनाओं तथा कर्मानुसार विभिन्न योनियोंमें उनके जन्मका उल्लेख]  »  श्लोक d8
 
 
श्लोक  13.159.d8 
तस्य मायामया: पाशा न वेद्यन्ते सुरासुरै:।
को हि मानुषमात्रस्तु देवस्य चरितं महत्॥
 
 
अनुवाद
उनका जाल माया से भरा हुआ है, जिसे न तो देवता जानते हैं और न ही दानव। फिर मनुष्यों में ऐसा कौन है जो यमदेव के महान चरित्र को जान सके?
 
His trap is full of illusions, which neither the gods nor the demons know. Then who among the humans is there who can know the great character of Yamdev?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)