vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 13: अनुशासन पर्व
»
अध्याय 159: यमलोक तथा वहाँके मार्गोंका वर्णन, पापियोंकी नरकयातनाओं तथा कर्मानुसार विभिन्न योनियोंमें उनके जन्मका उल्लेख]
»
श्लोक d56
श्लोक
13.159.d56
पञ्चकष्टमिति ख्यातं नरकं पञ्चमं प्रिये।
तत्र दु:खमनिर्देश्यं महाघोरं यथातथम्॥
अनुवाद
हे प्रिये! पाँचवें नरक का नाम पंचकष्ट है। वहाँ जो अपार दुःख भोगना पड़ता है, उसका वर्णन नहीं किया जा सकता।
Dear! The name of the fifth hell is Panchakashta. The immense suffering that one experiences there cannot be described in detail.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×