श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 159: यमलोक तथा वहाँके मार्गोंका वर्णन, पापियोंकी नरकयातनाओं तथा कर्मानुसार विभिन्न योनियोंमें उनके जन्मका उल्लेख]  »  श्लोक d4
 
 
श्लोक  13.159.d4 
श्रीमहेश्वर उवाच
शृणु कल्याणि तत् सर्वं यत् ते देवि मन:प्रियम्।
दक्षिणस्यां दिशि शुभे यमस्य सदनं महत्॥
 
 
अनुवाद
श्री महेश्वर बोले- कल्याणी! देवी! तुम्हारे मन में पूछने योग्य जो भी प्रश्न हों, उनका उत्तर सुनो। शुभ हो! दक्षिण दिशा में यमराज का विशाल भवन है।
 
Shri Maheshwar said-Kalyani! Goddess! Listen to the answers to all the things that are worth asking in your mind. Good luck! There is a huge building of Yamraj in the south direction.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)