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mahabharat 13.158.d9: उन्होंने पूछा, "इस संसार में रहने वाले चार प्रकार के जीवों को ज्ञान कैसे प्राप्त होता है? क्या यह कृत्रिम है या प्राकृतिक? कृपया मुझे यह बताइए।"   |   mahabharat अध्याय 13.158: प्राणियोंके चार भेदोंका निरूपण, पूर्वजन्मकी स्मृतिका रहस्य, मरकर फिर लौटनेमें कारण स्वप्नदर्शन, दैव और पुरुषार्थ तथा पुनर्जन्मका विवेचन]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 158: प्राणियोंके चार भेदोंका निरूपण, पूर्वजन्मकी स्मृतिका रहस्य, मरकर फिर लौटनेमें कारण स्वप्नदर्शन, दैव और पुरुषार्थ तथा पुनर्जन्मका विवेचन]  »  श्लोक d9
 
 
श्लोक  13.158.d9 
उमोवाच
चतुर्विधानां जन्तूनां कथं ज्ञानमिह स्मृतम्।
कृत्रिमं तत्स्वभावं वा तन्मे शंसितुमर्हसि॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने पूछा, "इस संसार में रहने वाले चार प्रकार के जीवों को ज्ञान कैसे प्राप्त होता है? क्या यह कृत्रिम है या प्राकृतिक? कृपया मुझे यह बताइए।"
 
He asked - How do the four kinds of creatures living in this world get knowledge? Is it artificial or natural? Please tell me this.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)