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mahabharat 13.158.d75: हे देवी! वेदों पर पूर्ण श्रद्धा रखकर ही 'परलोक और पुनर्जन्म' का अस्तित्व मानना ​​चाहिए। यही आस्तिक के लिए कल्याणकारी है।   |   mahabharat अध्याय 13.158: प्राणियोंके चार भेदोंका निरूपण, पूर्वजन्मकी स्मृतिका रहस्य, मरकर फिर लौटनेमें कारण स्वप्नदर्शन, दैव और पुरुषार्थ तथा पुनर्जन्मका विवेचन]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.158.d75 
केवलं श्रद्धया देवि श्रुतिमात्रनिविष्टया।
ततोऽस्तीत्येव मन्तव्यं तथा हितमवाप्नुयात्॥
 
 
अनुवाद
हे देवी! वेदों पर पूर्ण श्रद्धा रखकर ही 'परलोक और पुनर्जन्म' का अस्तित्व मानना ​​चाहिए। यही आस्तिक के लिए कल्याणकारी है।
 
Goddess! Only by having complete faith in the Vedas, one should believe that ‘afterlife and rebirth exist’. This is beneficial for the believer.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)