Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.158.d74: यह ब्रह्माजी द्वारा रची हुई माया है, जिसे समझना देवताओं और दानवों के लिए भी बहुत कठिन है; फिर यदि भ्रष्ट बुद्धि वाले मनुष्य इस संसार में इस विषय को जानना चाहें, तो कैसे जान सकेंगे?   |   mahabharat अध्याय 13.158: प्राणियोंके चार भेदोंका निरूपण, पूर्वजन्मकी स्मृतिका रहस्य, मरकर फिर लौटनेमें कारण स्वप्नदर्शन, दैव और पुरुषार्थ तथा पुनर्जन्मका विवेचन]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 158: प्राणियोंके चार भेदोंका निरूपण, पूर्वजन्मकी स्मृतिका रहस्य, मरकर फिर लौटनेमें कारण स्वप्नदर्शन, दैव और पुरुषार्थ तथा पुनर्जन्मका विवेचन]  »  श्लोक d74
 
 
श्लोक  13.158.d74 
एषा ब्रह्मकृता माया दुर्विज्ञेया सुरासुरै:।
किं पुनर्मानवैर्लोके ज्ञातुकामै: कुबुद्धिभि:॥
 
 
अनुवाद
यह ब्रह्माजी द्वारा रची हुई माया है, जिसे समझना देवताओं और दानवों के लिए भी बहुत कठिन है; फिर यदि भ्रष्ट बुद्धि वाले मनुष्य इस संसार में इस विषय को जानना चाहें, तो कैसे जान सकेंगे?
 
This is the illusion created by Brahmaji, which even the gods and demons find very difficult to understand; then if humans with corrupted intellect want to know about this subject in this world, then how can they know it?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)