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mahabharat 13.158.d72: जो लोग वेदों से घृणा करते हैं, मूर्ख हैं, नास्तिक हैं, अनिर्णायक हैं, निष्क्रिय हैं और जो मांसाहारियों को बिना कुछ दिए अपने घर से निकाल देते हैं, वे निम्नतम स्तर पर पहुँच जाते हैं।   |   mahabharat अध्याय 13.158: प्राणियोंके चार भेदोंका निरूपण, पूर्वजन्मकी स्मृतिका रहस्य, मरकर फिर लौटनेमें कारण स्वप्नदर्शन, दैव और पुरुषार्थ तथा पुनर्जन्मका विवेचन]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 158: प्राणियोंके चार भेदोंका निरूपण, पूर्वजन्मकी स्मृतिका रहस्य, मरकर फिर लौटनेमें कारण स्वप्नदर्शन, दैव और पुरुषार्थ तथा पुनर्जन्मका विवेचन]  »  श्लोक d72
 
 
श्लोक  13.158.d72 
श्रुतविद्वेषिणो मूर्खा नास्तिकादृढनिश्चया:।
निष्क्रियास्तु निरन्नादा: पतन्त्येवाधमां गतिम्॥
 
 
अनुवाद
जो लोग वेदों से घृणा करते हैं, मूर्ख हैं, नास्तिक हैं, अनिर्णायक हैं, निष्क्रिय हैं और जो मांसाहारियों को बिना कुछ दिए अपने घर से निकाल देते हैं, वे निम्नतम स्तर पर पहुँच जाते हैं।
 
People who hate the Vedas, are fools, atheists, indecisive people, inactive and those who throw out non-vegetarians from their homes without giving anything to them, reach the lowest level.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)