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श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 158: प्राणियोंके चार भेदोंका निरूपण, पूर्वजन्मकी स्मृतिका रहस्य, मरकर फिर लौटनेमें कारण स्वप्नदर्शन, दैव और पुरुषार्थ तथा पुनर्जन्मका विवेचन]  »  श्लोक d71
 
 
श्लोक  13.158.d71 
तस्मात् स्वर्गाभिगन्तार: कतिचित् त्वभवन् नरा:।
अन्ये करणहीनत्वान्नास्तिक्यं भावमाश्रिता:॥
 
 
अनुवाद
अतः कुछ ही लोग उपर्युक्त साधनों से संपन्न होकर स्वर्ग आदि पुण्य लोकों में जाते हैं। अन्य लोग उन साधनों से रहित होकर नास्तिक प्रवृत्ति अपना लेते हैं।
 
Therefore, only a few people, being endowed with the above mentioned means, go to heaven and other pious worlds. Other people, being devoid of those means, adopt atheistic attitude.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)