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श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 158: प्राणियोंके चार भेदोंका निरूपण, पूर्वजन्मकी स्मृतिका रहस्य, मरकर फिर लौटनेमें कारण स्वप्नदर्शन, दैव और पुरुषार्थ तथा पुनर्जन्मका विवेचन]  »  श्लोक d70
 
 
श्लोक  13.158.d70 
एवं श्रद्धाभवं लोके परत: सुमहत् फलम्।
बुद्धि: श्रद्धा च विनय: करणानि हितैषिणाम्॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार श्रद्धा के कारण परलोक में महान फल प्राप्त होते हैं। जो लोग अपना कल्याण चाहते हैं, उनके लिए बुद्धि, श्रद्धा और विनम्रता ही उन्नति के कारण (साधन) हैं।
 
In this way, one attains great rewards in the next world due to faith. For those who seek their own welfare, wisdom, faith and humility are the reasons (means of progress).
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)