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mahabharat 13.158.d66: नारद कहते हैं: जब रुद्राणी ने यह प्रश्न पूछा, तो ऋषियों का पूरा समूह एकाग्र हो गया और उत्तर सुनने के लिए उत्सुक हो गया।   |   mahabharat अध्याय 13.158: प्राणियोंके चार भेदोंका निरूपण, पूर्वजन्मकी स्मृतिका रहस्य, मरकर फिर लौटनेमें कारण स्वप्नदर्शन, दैव और पुरुषार्थ तथा पुनर्जन्मका विवेचन]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 158: प्राणियोंके चार भेदोंका निरूपण, पूर्वजन्मकी स्मृतिका रहस्य, मरकर फिर लौटनेमें कारण स्वप्नदर्शन, दैव और पुरुषार्थ तथा पुनर्जन्मका विवेचन]  »  श्लोक d66
 
 
श्लोक  13.158.d66 
नारद उवाच
प्रश्नमेतत् तु पृच्छन्त्या रुद्राण्या परिषत् तदा।
कौतूहलयुता श्रोतुं समाहितमनाभवत्॥
 
 
अनुवाद
नारद कहते हैं: जब रुद्राणी ने यह प्रश्न पूछा, तो ऋषियों का पूरा समूह एकाग्र हो गया और उत्तर सुनने के लिए उत्सुक हो गया।
 
Narada says: When Rudrani asked this question, the entire group of sages became focused and eager to hear the answer.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)