Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.158.d63: तप-दान आदि सभी कर्म व्यर्थ लगते हैं, परन्तु आत्मा का पुनर्जन्म नहीं होता। ऐसी मान्यता कुछ लोगों की है।   |   mahabharat अध्याय 13.158: प्राणियोंके चार भेदोंका निरूपण, पूर्वजन्मकी स्मृतिका रहस्य, मरकर फिर लौटनेमें कारण स्वप्नदर्शन, दैव और पुरुषार्थ तथा पुनर्जन्मका विवेचन]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 158: प्राणियोंके चार भेदोंका निरूपण, पूर्वजन्मकी स्मृतिका रहस्य, मरकर फिर लौटनेमें कारण स्वप्नदर्शन, दैव और पुरुषार्थ तथा पुनर्जन्मका विवेचन]  »  श्लोक d63
 
 
श्लोक  13.158.d63 
तपोदानानि यत् कर्म तत्र तद् दृश्यते वृथा।
नास्ति पौनर्भवं जन्म इति केचिद् व्यवस्थिता:॥
 
 
अनुवाद
तप-दान आदि सभी कर्म व्यर्थ लगते हैं, परन्तु आत्मा का पुनर्जन्म नहीं होता। ऐसी मान्यता कुछ लोगों की है।
 
All acts like penance and charity etc. seem futile, but the soul does not take rebirth. This is the belief of some people.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)