Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.158.d62: जैसे एक वृक्ष फल उत्पन्न करता है, वैसे ही सब कुछ प्रकृति द्वारा उत्पन्न होता है। जैसे सागर से लहरें निकलती हैं, वैसे ही संसार का आकार प्रकृति द्वारा उत्पन्न होता है। | mahabharat अध्याय 13.158: प्राणियोंके चार भेदोंका निरूपण, पूर्वजन्मकी स्मृतिका रहस्य, मरकर फिर लौटनेमें कारण स्वप्नदर्शन, दैव और पुरुषार्थ तथा पुनर्जन्मका विवेचन] । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जैसे एक वृक्ष फल उत्पन्न करता है, वैसे ही सब कुछ प्रकृति द्वारा उत्पन्न होता है। जैसे सागर से लहरें निकलती हैं, वैसे ही संसार का आकार प्रकृति द्वारा उत्पन्न होता है।
Just as a tree produces fruit, similarly everything is produced by nature. Just as waves emerge from the ocean, similarly the shape of the world emerges by nature.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥