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mahabharat 13.158.d60: जो व्यक्ति अपने कर्तव्यों का पालन नहीं करता, उसे दैवी सहायता प्राप्त नहीं होती; इसलिए सभी कार्यों का प्रारम्भ भाग्य और मानवीय प्रयास दोनों पर निर्भर है।   |   mahabharat अध्याय 13.158: प्राणियोंके चार भेदोंका निरूपण, पूर्वजन्मकी स्मृतिका रहस्य, मरकर फिर लौटनेमें कारण स्वप्नदर्शन, दैव और पुरुषार्थ तथा पुनर्जन्मका विवेचन]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 158: प्राणियोंके चार भेदोंका निरूपण, पूर्वजन्मकी स्मृतिका रहस्य, मरकर फिर लौटनेमें कारण स्वप्नदर्शन, दैव और पुरुषार्थ तथा पुनर्जन्मका विवेचन]  »  श्लोक d60
 
 
श्लोक  13.158.d60 
नरस्याकुर्वत: कर्म दैवसम्पन्न लभ्यते।
तस्मात् सर्वसमारम्भो दैवमानुषनिर्मित:॥
 
 
अनुवाद
जो व्यक्ति अपने कर्तव्यों का पालन नहीं करता, उसे दैवी सहायता प्राप्त नहीं होती; इसलिए सभी कार्यों का प्रारम्भ भाग्य और मानवीय प्रयास दोनों पर निर्भर है।
 
A person who does not perform his duties does not receive divine help; hence the commencement of all works is dependent on both destiny and human endeavour.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)