Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.158.d59: जैसे इस संसार में भूमि खोदने से जल और लकड़ी मथने से अग्नि प्राप्त होती है, वैसे ही पुरुषार्थ करने से ईश्वर की सहायता स्वतः ही प्राप्त हो जाती है। | mahabharat अध्याय 13.158: प्राणियोंके चार भेदोंका निरूपण, पूर्वजन्मकी स्मृतिका रहस्य, मरकर फिर लौटनेमें कारण स्वप्नदर्शन, दैव और पुरुषार्थ तथा पुनर्जन्मका विवेचन] । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
खननान्मथनाल्लोके जलाग्निप्रापणं तथा।
तथा पुरुषकारे तु दैवसम्पत् समाहिता॥
अनुवाद
जैसे इस संसार में भूमि खोदने से जल और लकड़ी मथने से अग्नि प्राप्त होती है, वैसे ही पुरुषार्थ करने से ईश्वर की सहायता स्वतः ही प्राप्त हो जाती है।
Just as in this world, water is obtained by digging land and fire is obtained by churning wood, in the same way, by making efforts, one automatically gets the help of God.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥