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mahabharat 13.158.d52-d53: बीज बोना और काटना मनुष्य का काम है; किन्तु समय पर वर्षा होना, बोआई का अच्छा परिणाम, बीजों का अंकुरित होना और व्यवस्थित रूप से फसल का उगना, ये सब देवताओं के कार्य हैं। ये कार्य देवताओं की कृपा से ही संपन्न होते हैं।   |   mahabharat अध्याय 13.158: प्राणियोंके चार भेदोंका निरूपण, पूर्वजन्मकी स्मृतिका रहस्य, मरकर फिर लौटनेमें कारण स्वप्नदर्शन, दैव और पुरुषार्थ तथा पुनर्जन्मका विवेचन]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 158: प्राणियोंके चार भेदोंका निरूपण, पूर्वजन्मकी स्मृतिका रहस्य, मरकर फिर लौटनेमें कारण स्वप्नदर्शन, दैव और पुरुषार्थ तथा पुनर्जन्मका विवेचन]  »  श्लोक d52-d53
 
 
श्लोक  13.158.d52-d53 
रोपणं चैव लवनं यच्चान्यत् पौरुषं स्मृतम्॥
काले वृष्टि: सुवापं च प्ररोह: पंक्तिरेव च।
एवमादि तु यच्चान्यत् तद् दैवतमिति स्मृतम्॥
 
 
अनुवाद
बीज बोना और काटना मनुष्य का काम है; किन्तु समय पर वर्षा होना, बोआई का अच्छा परिणाम, बीजों का अंकुरित होना और व्यवस्थित रूप से फसल का उगना, ये सब देवताओं के कार्य हैं। ये कार्य देवताओं की कृपा से ही संपन्न होते हैं।
 
Sowing and harvesting of seeds is the work of man; however, timely rains, good results of sowing, sprouting of seeds and appearance of crops in a systematic manner are the works of the gods. These works are accomplished only with the favour of the gods.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)