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mahabharat 13.158.d51: अच्छे प्रयत्न करने से यश मिलता है और बुरे उपायों पर निर्भर रहने से अपयश। हे देवी! संसार की स्थिति प्राचीन काल से ऐसी ही रही है।   |   mahabharat अध्याय 13.158: प्राणियोंके चार भेदोंका निरूपण, पूर्वजन्मकी स्मृतिका रहस्य, मरकर फिर लौटनेमें कारण स्वप्नदर्शन, दैव और पुरुषार्थ तथा पुनर्जन्मका विवेचन]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 158: प्राणियोंके चार भेदोंका निरूपण, पूर्वजन्मकी स्मृतिका रहस्य, मरकर फिर लौटनेमें कारण स्वप्नदर्शन, दैव और पुरुषार्थ तथा पुनर्जन्मका विवेचन]  »  श्लोक d51
 
 
श्लोक  13.158.d51 
सुयत्नाल्लभ्यते कीर्तिर्दुर्यत्नादयशस्तथा।
एवं लोकगतिर्देवि आदिप्रभृति वर्तते॥
 
 
अनुवाद
अच्छे प्रयत्न करने से यश मिलता है और बुरे उपायों पर निर्भर रहने से अपयश। हे देवी! संसार की स्थिति प्राचीन काल से ऐसी ही रही है।
 
Making good efforts leads to fame and relying on bad measures leads to infamy. Goddess! The state of the world has been like this since ancient times.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)