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mahabharat 13.158.d5: जो राजा कुमार्ग पर चलने वालों पर शासन करता है, उसे धर्म का फल मिलता है। एक चिकित्सक रोगी का उपचार करते समय उसे कष्ट देता है, किन्तु चूँकि वह रोग का निवारण करने का प्रयास करता है, इसलिए उसे लाभ प्राप्त होता है।   |   mahabharat अध्याय 13.158: प्राणियोंके चार भेदोंका निरूपण, पूर्वजन्मकी स्मृतिका रहस्य, मरकर फिर लौटनेमें कारण स्वप्नदर्शन, दैव और पुरुषार्थ तथा पुनर्जन्मका विवेचन]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 158: प्राणियोंके चार भेदोंका निरूपण, पूर्वजन्मकी स्मृतिका रहस्य, मरकर फिर लौटनेमें कारण स्वप्नदर्शन, दैव और पुरुषार्थ तथा पुनर्जन्मका विवेचन]  »  श्लोक d5
 
 
श्लोक  13.158.d5 
उन्मार्गप्रतिपन्नांश्च शास्ता धर्मफलं लभेत्॥
चिकित्सकश्च दु:खानि जनयन् हितमाप्नुयात्।
 
 
अनुवाद
जो राजा कुमार्ग पर चलने वालों पर शासन करता है, उसे धर्म का फल मिलता है। एक चिकित्सक रोगी का उपचार करते समय उसे कष्ट देता है, किन्तु चूँकि वह रोग का निवारण करने का प्रयास करता है, इसलिए उसे लाभ प्राप्त होता है।
 
A king who rules over those who are walking on the wrong path, gets the fruits of Dharma. While treating a patient, a doctor gives him pain, but because he tries to cure the disease, he gets the benefit.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)