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mahabharat 13.158.d48: मनुष्य में दो प्रकार के कर्म देखे जाते हैं, एक तो पूर्वजन्म में किये गये कर्म और दूसरा इस लोक में किये गये कर्म।   |   mahabharat अध्याय 13.158: प्राणियोंके चार भेदोंका निरूपण, पूर्वजन्मकी स्मृतिका रहस्य, मरकर फिर लौटनेमें कारण स्वप्नदर्शन, दैव और पुरुषार्थ तथा पुनर्जन्मका विवेचन]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 158: प्राणियोंके चार भेदोंका निरूपण, पूर्वजन्मकी स्मृतिका रहस्य, मरकर फिर लौटनेमें कारण स्वप्नदर्शन, दैव और पुरुषार्थ तथा पुनर्जन्मका विवेचन]  »  श्लोक d48
 
 
श्लोक  13.158.d48 
लक्ष्यते द्विविधं कर्म मानुषेष्वेव तच्छृणु।
पुराकृतं तयोरेकमैहिकं त्वितरत् तथा॥
 
 
अनुवाद
मनुष्य में दो प्रकार के कर्म देखे जाते हैं, एक तो पूर्वजन्म में किये गये कर्म और दूसरा इस लोक में किये गये कर्म।
 
Listen to two types of karma seen in human beings. One of these is the karma done in the past and the other is done in this world.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)