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mahabharat 13.158.d47: श्री महेश्वर बोले- देवी! मैं तुमसे सार बात कह रहा हूँ, उसे एकाग्र होकर सुनो।   |   mahabharat अध्याय 13.158: प्राणियोंके चार भेदोंका निरूपण, पूर्वजन्मकी स्मृतिका रहस्य, मरकर फिर लौटनेमें कारण स्वप्नदर्शन, दैव और पुरुषार्थ तथा पुनर्जन्मका विवेचन]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 158: प्राणियोंके चार भेदोंका निरूपण, पूर्वजन्मकी स्मृतिका रहस्य, मरकर फिर लौटनेमें कारण स्वप्नदर्शन, दैव और पुरुषार्थ तथा पुनर्जन्मका विवेचन]  »  श्लोक d47
 
 
श्लोक  13.158.d47 
श्रीमहेश्वर उवाच
तदहं ते प्रवक्ष्यामि शृणु तत्त्वं समाहिता।
 
 
अनुवाद
श्री महेश्वर बोले- देवी! मैं तुमसे सार बात कह रहा हूँ, उसे एकाग्र होकर सुनो।
 
Shri Maheshwar said- Devi! I am telling you the essence of the matter, listen to it with concentration.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)